जल पुलिस

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1. परिचय

कुम्भ मेला श्रद्धालुओं के विशिष्ट तिथियों में वैदिक स्नान से ही संपन्न होता है। नदियों में स्नान के साथ-साथ संपूर्ण नदी में भी श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्थित रखना उत्तर प्रदेश पुलिस की विशिष्ट प्रशिक्षित शाखा, जल पुलिस के द्वारा ही संभव है| श्रद्धालुओं के स्नान हेतु सावधानियों को बरतते हुए संगम किनारे 11 किमी के क्षेत्र में 35 से अधिक स्नान घाटों पर सुरक्षा का उत्तरदायित्व जल पुलिस के जवानो का है। श्रद्धालुओं के लिए त्रुटिरहित प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए जल पुलिस द्वारा विस्तृत रूप से योजनाओं बनायी गयी हैं।

श्रद्धालुओं का भारी संख्या में आगमन के दृष्टिगत, जल पुलिस को चार स्टेशनों में विभाजित किया गया है:-

  • किला घाट
  • सच्चाबाबा
  • लोवर संगम
  • फाफामऊ

उक्त थानों के अंतर्गत आने वाले स्नान घाटों की संख्या निम्न प्रकार है:-

  • किला घाट – 13 घाट
  • सच्चाबाबा – 09 घाट
  • लोवर संगम – 09 घाट
  • फाफामऊ – 10 घाट

जिसमें थाना किला घाट के अन्तर्गत 13 घाट, थाना सच्चाबाबा के अन्तर्गत 9 घाट, थाना लोवर संगम के अन्तर्गत 9 घाट व थाना फाफामऊ के अन्तर्गत 10 घाट बनाये गये हैं।

2. कुम्भ के दौरान जल सुरक्षा प्रबंध

इस वर्ष कुम्भ मेला में जल पुलिस प्रबन्धन हेतु अनेक नवीन व्यवस्थायें की जा रही हैं। कुम्भ के दौरान प्रयागराज के घाटों पर स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लाखों में होती, जिसके चलते घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है। विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जल पुलिस द्वारा कुम्भ के दौरान विभिन्न सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित किया गया है, जिसका विवरण निम्न प्रकार है:-

  • विशेष प्रकार के डीप वॉटर बैरिकेडिंग का प्रावधान किया गया है, जिनमे थर्मोप्लास्टिक फ्लोटिंग ब्लॉक को स्थापित किया गया है, जिनके नीचे जाल बिछाया जा रहा है, जिससे किसी प्रकार की अनहोनी घटित होने पर स्नान कर रहे श्रद्धालु अथवा घाट पर मौजूद लोगों की गहरे पानी में डूबने की संभावना नगण्य हो जाएगी।

  • घाट पर जल पुलिस द्वारा पुलिस कर्मियों को भी तैनात किया जाएगा जो घाट पर आ रहे श्रद्धालुओं को निर्धारित सीमा से आगे जाने से रोकेंगे।
  • अन्य संभावित आपातकालीन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जल पुलिस प्रशासन द्वारा नदी में चल रही नावों को आपस में टकराने से रोकने हेतु अथवा पलटने से बचाने हेतु थर्मोप्लास्टिक फ्लोटिंग ब्लॉक एवं सौर्य ऊर्जा की सहायता से रिफ्लेक्टिव रिवरलाइनों को सृजित किया गया है। इससे नाविकों पर निगरानी रखने में भी मदद मिलेगी कि वे नदी में किसी प्रकार अतिक्रमण की स्थिति न पैदा करें।

  • उक्त के अतिरिक्त जल पुलिस द्वारा फ्लोटिंग जेट्टी, सभी प्रकार की जल गतिविधियों का अनुश्रवण करने हेतु आधुनिक जल नियंत्रण कक्ष, निरंतर बिजली आपूर्ति हेतु आस्का लाइट, 100 से अधिक चालकों हेतु डाइविंग सूट का प्रावधान किया गया है, तथा अन्य किसी आपातकालीन स्थिति में विशेषज्ञों द्वारा रिमोट कंट्रोल लाइफबॉय का प्रयोग किया जाएगा।
  • श्रद्धालुओं को नावों पर चढ़ने हेतु इस वर्ष फ्लोटिंग जेट्टी का निर्माण किया जा रहा है जो पुरानी व्यवस्था में इस्तेमाल में लायी जाने वाली बालू व पटरे की बनी जेट्टियों की अपेक्षा ज्यादा सुविधाजनक व आकर्षक भी हैं।

  • जल यातायात नियंत्रण हेतु आधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों से लैस अत्याधुनिक कन्ट्रोल रूम की व्यवस्था होगी जिससे जल यातायात प्रबन्धन के अतिरिक्त राहत एवं बचाव कार्य में पहले के मुकाबले कहीं अधिक सहायता मिलेगी।
  • कुम्भ में स्नानार्थियों को रात्रि में किसी भी अप्रिय घटना से बचाने हेतु जल में समुचित प्रकाश की व्यवस्था की गई है। जो रात्रि के समय जल में दृश्यता के साथ-साथ राहत व बचाव कार्यों में भी सहायक सिद्ध होगी। स्नान करने हेतु प्रकाश की व्यवस्था हेतु गंगा/यमुना घाटों पर व रिवर लाइन हेतु आस्का लाइट की व्यवस्था की जाएगी जिसका प्रयोग वाटर कन्ट्रोलरूम में भी किया जाएगा।

  • डूबते व्यक्तियों को तत्काल बचाने हेतु रिमोट संचालित लाइफ ब्वाय की व्यवस्था की गयी है इसी प्रकार डूबे व्यक्तियों को खोजने हेतु गोताखोरों को अधिक सक्षम बनाने हेतु अधिक संख्या में डाइविंग सूट की व्यवस्था की गयी है जिसकी सहायता से गोताखोर पानी के अन्दर 1 घन्टे से अधिक समय तक रह सकते हैं।

  • श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुगमता हेतु 10 से अधिक रिवर एम्बुलेंस को तैनात किया जा रहा है, जिससे आवश्कतानुसार संगम क्षेत्र में बचाव एवं राहत कार्य को संचालित किया जा सके।
  • सम्पूर्ण कुम्भ मेले में अथाह जनसमूह के स्नान के समय डूबने से बचाव हेतु अधिक संख्या में गोताखोरों, बाढ़राहत पी०ए०सी० (कम्पनी), एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, होमगार्ड तैराक व अन्य पुलिस बल तैराकों की व्यवस्था की गयी है।

3. हेल्पलाइन नंबर

कुम्भ के दौरान यदि किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना घटित हो जाती है जैसे :- कोई व्यक्ति डूब रहा हो, घाट के किसी स्थल पर भगदड़ मच जाए, नदी के बीच में नाव में किसी प्रकार की कोई समस्या आ जाए जिससे यात्रियों को खतरा हो, नावों का अतिक्रमण आदि की परिस्थिति में हमारी हेल्पलाइन नंबर 100 पर बिना किसी विलम्ब और झिझक के संपर्क करें।


हेल्पलाइन नम्बर :100