फायर सर्विस

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1. परिचय

कुम्भ 2019 जैसे भव्य समागम में जिसमें आगमन करने वाले श्रद्धालुओं एवं तीर्थयात्रियों की संख्या करोड़ों में अनुमानित की गई है, प्रशासन द्वारा सभी प्रकार की आकस्मिक स्थितियों (जिसमें अनअपेक्षित कारणों से हुई आपदाएं भी शामिल हैं) के लिए तैयार रहना आवश्यक है। ऐसी स्थितियों का सामना करने के लिए उत्तर प्रदेश अग्नि शमन सेवा एक विशेष रूप से प्रशिक्षित बल है जो अग्नि सम्बंधित आपदा, बचाव एवं अन्य गतिविधियों से निपटने में सक्षम है। उत्तर प्रदेश अग्नि शमन सेवा नवीनतम तकनीकों और उपकरणों का इस्तेमाल कर किसी भी प्रकार की अग्नि सम्बंधित आकस्मिकता हेतु प्रभावशाली योजनाएं एवं रणनीति बनाने में समर्थ हैं।

कुम्भ के दौरान किसी भी प्रकार की अग्नि सम्बंधित आकस्मिक स्थिति के रोकथाम हेतु उत्तर प्रदेश अग्नि शमन सेवा प्रभावी निवारक रणनीति बनाने में योग्य है। इसके अतिरिक्त, उत्तर प्रदेश अग्नि शमन सेवा ने कुम्भ में तैनात विभिन्न आधिकारिक एजेंसियों से सामंजस्य स्थापित कर लिया है जिससे वह कुम्भ मेला क्षेत्र की स्थिति पर नज़र रख किसी भी आपातकालीन स्थिति के लिए तैयार रह सके।

अग्नि आकस्मिकता स्थिति से निपटने हेतु 40 अग्निशमन केन्द्र एवं 15 अग्नि शमन चौकियों को स्थापित किया गया है, जो निम्नलिखित संसाधनों से लैस होंगे:

  • मध्य एवं उच्च क्षमता युक्त अग्निशमन ट्रकें।
  • वॉटर शावरिंग की सुविधा से युक्त बाइकें एवं जीपें।
  • रेस्क्यू एण्ड फोम टेन्डर।
  • अग्निशमन यंत्र।
  • फायर एम्बुलेंस।
  • श्वास लेने हेतु उपकरण इत्यादि।

2. पुलिस एवं आकस्मिक सेवा में तैनात मानव शक्ति

कुम्भ मेला 2019 के दृष्टिगत प्रशासन द्वारा एक वृहद जनशक्ति का नियोजन किया जा रहा है। इस जनशक्ति में सिविल पुलिस, यातायात पुलिस एवं सशस्त्र पुलिस, केन्द्रीय सशस्त्र बल, जल पुलिस, चौकीदार एवं होमगार्डस के पर्याप्त बलों को मेले के आरंभ से समाप्ति तक सक्रिय रूप से तैनात किया जाएगा, जिन्हे पूर्ण रूप से मेले में घटित होने वाली संभावित परिस्थितियों हेतु प्रशिक्षित गया है। ये कुशल मानव बल आपकी सेवा में कुम्भ के आरंभ से समाप्ति तक तैनात रहेगा।

3. अग्निशमन विभाग का लक्ष्य एवं उद्देश्य

अग्निशमन विभाग द्वारा सख्त कार्यान्वयन व आग की रोकथाम और बचाव के लिये दिये गये दिशा-निर्देशों का कर्मचारियों द्वारा कड़ाई से पालन करते हुए भव्य और दिव्य कुम्भ-2019 के दौरान शून्य घटना के लक्ष्य को प्राप्त करने का अथक प्रयास व कुम्भ मेले के दौरान होने वाली किसी भी घटना पर तत्काल काबू पाने की उचित कार्यवाही तथा मेले के दौरान होने वाली जन-धन की हानि को रोकना साथ-साथ मेले में आये श्रद्धालुओं के लिए सौहार्द एवं सुरक्षित वातावरण प्रदान करना ही अग्निशमन विभाग का प्रमुख उद्देश्य है।

4. दिव्य एवं भव्य कुम्भ-2019 के दौरान अग्निशमन विभाग की अपेक्षित भूमिका

यह सर्व-विदित है कि अग्निशमन विभाग की भूमिका मेले के दौरान अति-महत्वपूर्ण रहती है एवं अग्निशमन विभाग का कार्य कुम्भ मेला स्थल पर मेला आरम्भ होने से पूर्व से लेकर मेले के समाप्ति होने के बाद तक रहता है। किसी भी आपातकालीन परिस्थिति के उत्पन्न होने पर अग्निशमन विभाग अन्य आपातकालीन इकाइयों जैसे- एन0डी0आर0एफ0, एस0डी0 आर0एफ0 और आपातकालीन चिकित्सा सेवा के साथ मिलकर काम करता है, साथ ही अग्निशमन विभाग की भूमिका किसी अन्य सहायक इकाई के साथ भी ओवरलैप हो सकती है। अतः अग्निशमन विभाग की अपनी एक अहम भूमिका है। अग्निशमन विभाग हर संभव एहतियात बरत रहा है जिससे कोई भी ऐसी परिस्थिति उत्पन्न न हो जिसमे जान-माल का नुकसान हो, पर यदि किसी कारणवश ऐसी परिस्थिति उत्पन्न हो जाती तो अग्निशमन विभाग सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है।

5. कुम्भ मेले के दौरान आगजनी होने के प्रमुख कारण

भीड़ वाले इलाकों में अक्सर आगजनी के प्रमुख कारण असावधानी बरतने का ही परिणाम होते हैं, जिसे लोग अक्सर नजर अंदाज कर देते हैं, इनमे से कुछ प्रमुख कारण जो आगजनी जैसी घटना को अंजाम दे सकते हैं निम्न प्रकार हैं:-

  • एल.पी.जी. का रिसाव और नियर मिस दुर्घटनाओं के कारण अनियंत्रित आग।
  • विद्युत स्पार्क।
  • धूम्रपान, बीड़ी, सिगरेट, चिलम इत्यादि का सेवन।
  • खुली आग या स्टोव की आग।
  • हवन कुंड की आग।
  • बोनफायर और अन्य विविध के कारण आग।
  • जगह-जगह पर सर्दी से बचाव हेतु जलाये गये अलाव।
  • पटाखों को जलाना।
  • विस्फोटक पदार्थ का प्रयोग इत्यादि

अतः कुम्भ में आने वाले श्रद्धालुओं से यह सविनय निवेदन है कि मेले के दौरान किसी प्रकार का धूम्रपान, विस्फोटक सामग्री का उपयोग न करें तथा अन्य ज्वलनशील सामग्रियों का प्रयोग सावधानी पूर्वक करें, क्योंकि किसी प्रकार की लापरवाही मेले में अशांति पैदा कर सकती है। यदि ऐसी कोई अप्रिय घटना मेला क्षेत्र में हो जाती है तो फायर पुलिस उससे निपटने के लिए तत्पर है एवं ऐसी घटनाओं को काबू करने के लिए सक्षम है।

6. अग्नि सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक प्रबंध

उ0प्र0 शासन की अपेक्षा के अनुरूप आगामी दिव्य एवं भव्य कुम्भ मेला 2019 के दौरान आने वाले श्रद्धालुगणों की अग्नि से सुरक्षा/अग्निशमन सम्बन्धी प्रबंधनों का व्यवस्थापन एवं उनकी यात्रा को दुर्घटना रहित/सुदृढ़ बनाने हेतु अग्नि सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक प्रबंध किये गये हैं, जिनका विवरण निम्नवत हैः-

  • मेला क्षेत्र को अग्नि सुरक्षा के दृष्टिगत 09 जोन एवं 20 सेक्टरों में विभाजित किया गया है।
  • मेला क्षेत्र में 40 अग्निशमन केंन्द्रों एवं 15 अग्निशमन चौकियों का निर्माण किया जा रहा है।
  • मेला क्षेत्र में दुर्घटना की सम्भावनाओं पर नजर रखने एवं त्वरित कार्यवाही हेतु 40 अग्नि दुर्घटना वॉच टावरों का निर्माण किया गया है।
  • मेला क्षेत्र में लगभग प्रत्येक 60-80 मीटर पर तकरीबन 4000 फायर हाइड्रेन्टो की व्यवस्था भी आपातकाल के दौरान जल आपूर्ति हेतु की गयी है।
  • कुम्भ मेला के दौरान अग्नि एवं जीवन सुरक्षा व्यवस्थाओं के दृष्टिगत 03 चरणीय अग्नि सुरक्षा/अग्निशमन प्रणाली को अपनाया गया है।
  • मेले में संकीर्ण मार्गों पर व्यवस्थापित अस्थाई पंडालों/शिविरों की अग्नि सुरक्षा एवं आपदा के समय त्वरित अग्निशमन /जीवरक्षा की कार्यवाही हेतु अत्याधुनिक उपकरणों एवं हल्के वाहनों का प्रयोग जैसे- अग्निशमन सुरक्षा उपकरणों से सुसज्जित मोटर साइकिल व हाईप्रेशर वाटरमिस्ट वाहन आदि का प्रयोग किया जा रहा है।

“आपकी चेतना व सतर्कता ही मुख्य सुरक्षा है”

  1. कुम्भ मेला के दौरान अग्नि एवं जीवन सुरक्षा व्यवस्थाओं को सुदृण बनाने हेतु लागू की जा रही 03 चरणीय अग्नि सुरक्षा/अग्निशमन प्रणाली का स्वरूपः-

“दिन हो या रात सुरक्षा की करिये बात”

8. प्रशिक्षण कार्यक्रमः

प्रशिक्षण को किसी भी दुर्घटना निवारण कार्यक्रम का आधार माना जाता है तथा प्रशिक्षण दुर्घटनाओं को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। सभी नियोक्ता तथा कर्मचारियों के लिए कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं की संख्या को कम करने में अग्नि सुरक्षा हेतु दिये गये प्रशिक्षण की अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका है। इसी लक्ष्य से सुनियोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जो कि मेले के दौरान अग्नि दुर्घटनाओं को कम करने व उन पर तत्काल काबू पाने में सार्थक सिद्ध होगा।

  • कुम्भ मेला के अन्दर आने वाले सभी अधिकारियों/कर्मचारियों को अग्नि सुरक्षा एवं बचाव हेतु प्रशिक्षण दिया गया है।
  • प्रचार एवं प्रसार दल के माध्यम से सभी कल्पवासियों व अन्य हितधारकों (जो कुम्भ मेला में सेवा करेंगे/वास करेंगे) को भी समय-समय पर जनजागरण अभियान चलाकर अग्नि सुरक्षा से सम्बन्धित जानकारियों से अवगत कराया जायेगा।
  • प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी व आकर्षित बनाने हेतु चलचित्रों के माध्यम से प्रशिक्षण योजना तैयार की गयी है।
  • नुक्कड़ नाटक आदि के माध्यम से जन-जागरण की योजना तैयार की गयी है ताकि मेले के दौरान लोगों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया जा सके। सिविल डिफेंस व अन्य स्वंय सेवी संस्थाओं के माध्यम से अग्नि सुरक्षा मित्रों की तैनाती की योजना को लागू किया जा रहा है ताकि उनके माध्यम से जन अभियान आयोजित किया जा सके एवं लोगों को अधिक से अधिक सचेत किया जा सके।

9. आकस्मिकता योजना

  • मेला क्षेत्र में किसी बड़े हादसे के दौरान अतिरिक्त सहायता हेतु मेला क्षेत्र के अंदर बने किले में उपलब्ध भारतीय सेना के अग्निशमन केंद्र पर उपलब्ध वाहनों व उपकरणों की सहायता प्राप्त की जायेगी ताकि किसी भी दुर्घटना के समय संभावित सहायता बिना किसी विलम्ब के की जा सके।
  • कोई बृहद अग्निकाण्ड होने पर आवश्यकतानुसार जनपदीय अग्निशमन व्यवस्था से भी सहायता प्राप्त की जायेगी।
  • मेला क्षेत्र में किसी भीषण अग्निकाण्ड की स्थिति में उस पर काबू पाने हेतु आवश्यकतानुसार भारतीय वायु सेना के पास प्रयागराज एयर बेस पर उपलब्ध अग्निशमन यंत्रो जैसे-बाम्बी बकेट्स इत्यादि अग्निशमन संसाधनों की सहायता भी प्राप्त की जायेगी ताकि वायुयान द्वारा प्रचुर मात्रा में जल छिड़काव कर दुर्घटना पर काबू पाया जा सके।

10. निगरानी टावर

कुम्भ 2019 में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मेला क्षेत्र में निगरानी टावर स्थापित किए जाएंगे तथा मेले में होने वाली गतिविधियों पर पुलिस बल नजर बनाए रखेगा। मेले के आरंभ से समाप्ति तक लगभग 12 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन की अपेक्षा की जा रही है अतः इन टावरों की मदद से भीड़ की गतिविधियों पर नजर बनाए रखना पुलिस के लिए काफी हद तक आसान हो जाएगा तथा संदिग्ध गतिविधियों का पता चल सकेगा। ये वॉच टावर काफी ऊंचे बनाए गए हैं ताकि एक टावर से अधिक से अधिक मेले क्षेत्र को कवर किया जा सके। साथ ही आकस्मिकताओं की दशा में प्रत्येक घाट के लिये विरचना के साथ विशेष निक्रमण (खाली कराना) योजनायें भी समेकित की गयी हैं। इन टावरों की कुल संख्या 40 होगी।

11. समेकित समादेश एवं नियंत्रण केन्द्र

इस तंत्र का उपयोग बहुसंख्या में विभागों का समेकन एवं एक सन्निरीक्षण मंच प्रदान करने के लिये किया जाता है। आकस्मिकताओं की दशा में सूचनायें स्थापित की गयी 21 आई0सी0सी0सी की मदद से सभी सम्बन्धित विभागों को संप्रेषित की जा सकती है।

12. कैसे संपर्क करें

  • कुम्भ-2019 के दौरान आग लगने या आपातकाल की घटना की सूचना देने के लिए अग्निशमन एवं पुलिस विभाग के दूरभाष नं0-1920 व 100 पर बिना घबराये सम्पर्क करें, ताकि समय रहते बचाव दल आप तक पहुंच सके तथा जन-धन की हानि को रोका जा सके “आपकी सही सूचना से बेहतर काम करने में मदद मिलती है,” अतः फोन करते समय धीरज से काम लें एवं उक्त नंबरों पर निम्नलिखित सूचना सही तरह से दें।
  • अपना नाम व पूरा पता।
  • जहां अग्निकांड हुआ है, उस स्थल का सही पता।
  • अपना फोन नंबर बताएं।
  • नजदीक की कोई पहचान की जगह बताएं (लैण्डमार्क)।
  • आपात घटना का स्वरूप बताएं।

“आपकी सतर्कता ही है हमारा सहयोग”

13. किसी प्रकार की अग्नि दुर्घटना घटित होने पर क्या करें, क्या न करें

13.1 क्या करें

  • आग लगने पर आग-आग का शोर मचाकर आस-पास के टेन्ट वासियों को सूचित/सावधान करें एवं तत्काल मेला कंट्रोल तथा क्षेत्र के पुलिस/फायर स्टेशनों को सूचित करें।
  • आपातकालीन समय में शांत रहें एवं धैर्य से काम लें तथा निकटतम आग बुझाने वाले यंत्र की तरफ दौड़े और उचित दूरी से बिना अपने आप को खतरे में डाले उसका प्रयोग करें।
  • अपने निकटतम निकास मार्गों को हमेशा ध्यान रखें तथा आग लगने पर उनका प्रयोग करें।
  • सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली पर ध्यान रखें और चौकस रहें।
  • अपने अग्निशमन यंत्र को सही ढंग से पहचाने ताकि आग बुझाने के लिए उसका उचित प्रयोग किया जा सके।
  • आग बुझाने हेतु पंडाल के पास पर्याप्त मात्रा में ड्रम व बाल्टी में पर्याप्त मात्रा में पानी तथा बालू भर कर रखें, जिससे आग लगने पर बालू/पानी का प्रयोग कर आग बुझाई जा सके।
  • आग लगे पंडाल/टेण्ट में रहने वाले व्यक्तियों/ बच्चों को अति शीघ्र सुरक्षित स्थान पर निकाल कर ले जाएं और टेन्ट/पंडाल की रस्सी/सुतली काटकर गिरा दें तथा पानी, बालू डालकर आग को बुझाने का यथा सम्भव प्रयास करें।
  • कोशिश करें की टेंट/पंडाल की रस्सी/बल्ली हटाकर नीचे गिरा दें ताकि अग्नि प्रसार की सम्भावना को रोका जा सके।
  • यदि गैस सिलेण्डर में आग लग जाती है तो उसे जमीन पर गिराने के बजाए सीधे खड़ा रखते हुए बाहर निकालने का प्रयास करें। साथ ही सिलेण्डर के आग वाले हिस्से पर गीले कपड़े/टाटों से पीट-पीट कर बुझाने का प्रयास करें व हो रहे गैस रिसाव को बंद करने हेतु प्रयास करें।
  • अग्निशमन विभाग के पहुंचने तक आग बुझाने का यथा सम्भव प्रयास करें।
  • अग्निशमन विभाग की गाड़ी जब घण्टा अथवा हूटर बजाते हुये आये तो आने के लिये रास्ता दें ताकि घटनास्थल तक पहुंचने में विलम्ब न हो।
  • आग बुझाने में अग्निशमन विभाग की मदद करें।
  • हमेशा साफ-सफाई रखें व आग से बचाव के लिये दिये जाने वाले अग्नि सुरक्षा प्रशिक्षणों में बढ़-चढ़कर भाग लें।

13.2 क्या ना करें

  • एक जगह भीड-भाड़ न करें, आपातकालीन वाहनों की आवाजाही में बाधा उत्पन्न न करें।
  • अपने वाहनों को सड़क के बीच में न खड़ा करें, ऐसा करने से आपको सहायता पहुंचाने में विलम्ब हो सकता है।
  • टेन्ट व छोलदारी बनाने में प्लास्टिक एवं सिन्थेटिक कपड़ों का प्रयोग कदापि न करें।
  • पंडालों/टेण्टों में खुली आग, चूल्हा, अलाव, हवन कुण्ड का प्रयोग न करें।
  • पंडालों/टेन्टों में हैलोजन लाइट, छोटा गैस सिलेण्डर का प्रयोग कदापि न करें।
  • पंडालों में नंगे एवं कटे-फटे विद्युत तारों का प्रयोग न करें और हीटर अथवा अन्य किसी ओवर लोड विद्युत उपकरण का प्रयोग न करें।
  • टेन्टों में ज्वलनशील पदार्थों जैसे पेट्रोल, मिट्टी का तेल, डीजल गैस या मोमबत्ती आदि का भण्डारण कदापि न करें तथा धूम्रपान न करें।
  • जलते हुए चिराग, स्टोव, लालटेन, गैस बत्ती में तेल न डालें।
  • तेज हवा के समय खुले में खाना न पकाएं।
  • दीपक, मोमबत्ती या खुली जलती आग को लेकर इधर-उधर न जाएं।
  • सिन्थेटिक, फाइबर के बने कपड़े पहनकर आग के नजदीक तथा हवन-कुण्ड, चूल्हा या अलाव के समीप न बैठें।
  • आपातकालीन मार्गों को कदापि बाधित न करें।
  • ऐस किसी स्थान पर न जायें जहाँ से आप आसानी से बाहर न निकल सकें।
  • आग की सूचना देते समय घबराये नहीं।
  • कुछ भी जलाने के बाद माचिस की तीली को लापरवाही से इधर-उधर न फेकें। फेंकने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि तीली सही रूप से बुझ गयी है।

14. कपड़ों पर आग लगने की स्थिति में क्या करें

  • एक जगह खड़े हो जायें, दौड़े नहीं।
  • अपने मुंह को अपने हाथों से ढकते हुए सुरक्षित स्थान देखकर जमीन पर लेट जाएं।
  • जमीन पर घूम-घूमकर-उलट-पलटकर आग को बुझाने का प्रयास करें। जब तक आग पूरी तरह से बुझ न जाए, प्रयास करते रहें।

15. अस्थाई पंडालों का निर्माण करते समय बरती जाने वाली सावधानियां –

पंडालों के अस्थायी निर्माण में ज्वलनशील पदार्थों का प्रयोग किसी भी दशा में न करें और जहां तक सम्भव हो आसानी से न जलने वाली सामग्री का उपयोग करें। किन्तु यदि ज्वलनशील प्रकृति की सामग्री का प्रयोग किया जाना अपरिहार्य है तो उन्हें निम्न प्रकार से निरोधक घोल बनाकर, उसमें डुबोकर, सुखा लिया जाये जिसके बाद ही उसका प्रयोग करें:-

15.1 घोल हेतु वांछित पदार्थो की निर्धारित मात्राः-

अमोनियम सल्फेट 04 भाग
अमोनियम कार्बोनेट 02 भाग
बोरेक्स 01 भाग
बोरिक एसिड 01 भाग
एलम 02 भाग
पानी 35 भाग
  • किसी भी दशा में पंडाल की ऊंचाई 03 मीटर से कम नही होनी चाहिए।
  • किसी भी दशा में पंडाल बिजली की लाईन के नीचे नही लगाया जाना चाहिए।
  • बाहर निकलने का गेट 05 मीटर से कम चौड़ा न हो एवं यदि रास्ता मेहराबदार (आर्च) बनाया जाए तो भूमितल से ऊँचाई 05 मीटर से कम नहीं होनी चाहिए।
  • सड़क से पंडाल अधिकतम 45 मीटर की दूरी पर ऐसे स्थान पर लगा होना चाहिए जिससे फायर सर्विस की मशीनें घटनास्थल तक आसानी से पहुंच सकें।
  • बाहर निकलने का रास्ता गुफा की तरह नहीं होना चाहिए।
  • बाहर निकलने के गेट इस प्रकार व इतनी संख्या में बनाये जायें कि किसी भी दशा में पंडाल के किसी भी स्थान से किसी व्यक्ति को बाहर निकलने हेतु 15 मीटर से अधिक दूरी न तय करनी पड़े। कुर्सियां लगाये जाने की दशा में यह सुनिश्चित हो कि कुर्सियों को किनारे से 1.2 मी0 जगह छोड़कर लगाया गया है व 12 कुर्सियों के बाद 1.5 मी0 का गलियारा छोड़ा जाए एवं इसके बाद पुनः 12 कुर्सियां लगायी जा सकती हों।
  • कुर्सियों को 4-4 के समूह में नीचे से बांधकर जमीन में कील गाड़कर स्थिर कर दिया जाए, जिससे भगदड़ के समय कुर्सियाँ अव्यवस्थित होकर बाहर निकलने के मार्ग को अवरूद्ध न कर दें।
  • निकास हेतु बनाये गये समस्त स्थानों पर स्थानीय भाषा में निकास/एग्जिट इतने आकार में अंकित हों जो पंडाल के प्रत्येक स्थान से दृष्टिगोचर हो सकें।
  • निकास/एग्जिट पंडाल का प्रयोग किए जाते समय प्रकाशमान हो तथा उस स्थान तक पहुंचने के लिए फ्लोरोसेन्ट पेन्ट से पेन्ट किये हुए दिशासूचक चिन्ह दृष्टिगोचर हों तथा इसके दृष्टिगोचर एवं प्रकाशमान होने के लिए बैटरी से चलने वाली पर्याप्त संख्या में इमर्जेन्सी लाईट का प्रावधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। अस्थाई निर्माण/पंडाल के सुरक्षित एवं स्वच्छ रखने हेतु सभी वांछित युक्तियों का प्रयोग किया जाना चाहिए।
  • अस्थाई निर्माण/पंडाल के अन्दर किसी भी ज्वलनशील पदार्थ अथवा रसायन का स्टोरेज निषिद्ध होगा।
  • मुख्य निर्माण कार्य 100 मि.मी. व्यास की साल या बांस जैसी लकड़ी की बल्लियां व शेष निर्माण कार्य हेतु उससे कम वांछित व्यास की बांस/बल्लियां, कीलों तथा स्टील के तार का प्रयोग इस प्रकार से किया जाए कि वह आंधी/तूफान जैसी आपदा को सहन कर सकें।
  • पंडाल के निर्माण कार्य में नायलॉन तथा ज्वलनशील पदार्थ की रस्सियों का प्रयोग पूर्णतया निषिद्ध हो व इसमें आवश्यकतानुसार क्वायर, मनीला या कोकोनट फाईबर का प्रयोग अग्निरोधक घोल में डूबोकर सुखाने के बाद किया जाए।
  • अस्थाई निर्माण/पंडाल में आग या चिन्गारी प्रज्वलित होने की दशा में ध्वनि से चेतावनी देने वाला प्रभावी फायर एलार्म सिस्टम लगाया जाना चाहिए जिसमे अग्निशमन कार्य हेतु नियुक्त किये गये स्टाफ के सदस्य व्यक्तिगत रूप से एकजुट होकर पंडाल खाली कराने या अग्निशमन हेतु अन्य वांछित कार्यवाही कर सकें।

16. अस्थाई पंडालों/शिविरों में विद्युत कार्य करते समय बरती जाने वाली सावधानियां-

  • तारों के जोड़ किसी भी दशा में खुले नहीं होने चाहिये। जहां तक संभव हो पोर्सलीन कनेक्टरों का प्रयोग होना चाहिये।
  • अस्थाई पंडालों/शिविरों में इमर्जेन्सी लाईट की व्यवस्था होनी चाहिये।
  • विद्युत का कोई भी सर्किट, बल्ब, ट्यूबलाईट आदि पंडाल के किसी भी भाग से कम से कम 15 सेमी0 दूर होना चाहिये।
  • हैलोजन लाईट का प्रयोग किसी भी दशा में पंडाल या अस्थायी निर्माण में नहीं किया जाना चाहिए।
  • पंडाल में प्रयोग की जाने वाली बिजली की तारें पी0वी0सी0 शीटेड कन्डक्टर्स या वल्कनाईज्ड रबर केबिल्स (जो सख्त रबड़ के बने हों) की होनी चाहिए।
  • प्रयोग में लायी जाने वाली विद्युत की तारें सामान्यतया ताम्बे से बनी होनी चाहिए तथा विद्युत सर्किट में एम0सी0बी0 व ई0एल0सी0बी0 का प्रयोग अनिवार्य रूप से होना चाहिए।
  • विद्युत की तारें किसी भी दशा में कार्पेट आदि के नीचे न रखकर सुरक्षित पाईपों के अन्दर से निकाली जानी चाहिए।
  • पंडाल में विद्युत की फिटिंग करने वाले लाइसेन्सधारी ठेकेदार का दायित्व निर्धारित हो कि वह सी0ओ0टू0 का अग्नि शमन उपकरण (फायर एक्सटिंगुशर) विद्युत डिस्ट्रीब्यूशन बोर्ड के पास व फोम टाइप का दूसरा फायर एक्सटिंग्यूशर रसोई हेतु उपलब्ध कराएँ।
  • पंडाल के अन्दर किसी भी दशा में चूल्हे/भट्ठी का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। अगर प्रयोग अपरिहार्य है तो, टीनशेड लगाकर पण्डाल से उचित दूरी पर अलग से किया जा सकता है।

 

17. श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था हेतु जनपद प्रयागराज में स्थापित फायर सर्विस स्टेशन

क्र० सं० नाम स्थल क्र० सं० नाम स्थल
1 फायर स्टेशन सिविल लाइन 13 रेलवे स्टेशन कोरांव
2 फायर स्टेशन नैनी 14 रेलवे स्टेशन सोरांव
3 फायर स्टेशन बारा 15 रेलवे स्टेशन हण्डिया
4 फायर स्टेशन मेजा 16 रेलवे स्टेशन फूलपुर
5 मुण्डेरा मण्डी 17 रेलवे स्टेशन झूंसी
6 रेलवे स्टेशन सिटी साइड 18 नव सृजित बस स्टेशन झूंसी
7 रेलवे स्टेशन सिविल लाइन साइड 19 रेलवे स्टेशन सुबेदारगंज
8 रेलवे स्टेशन रामबाग 20 रेलवे स्टेशन छिवकी
9 रेलवे स्टेशन प्रयाग 21 रेलवे स्टेशन फाफामऊ
10 रेलवे स्टेशन प्रयागघाट 22 रोडवेज बस अड्डा सिविल लाइन
11 शान्तिपुरम फाफामऊ सेक्टर 23 बस अड्डा जीरो रोड
12 रेलवे स्टेशन नैनी 24 के०पी० कॉलेज

हेल्पलाइन नम्बर :100