आपदा प्रबंधन

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1. परिचय

कुम्भ मेले में सम्भावित आपदाओं को रोकने तथा उनसे निपटने हेतु मानक कार्य पद्धति (एस0ओ0पी0) तैयार की गयी है। कार्य पद्धति बनाते समय इस बात का ध्यान रखा गया है कि प्रथमतः कोई आपदा घटित ही न हो, यदि हो भी जाए तो उसका प्रभाव यथा सम्भव कम से कम हो ताकि जनधन की न्यूनतम हानि हो। आपदाओं को नियंत्रित करने में जनबल एवं यांत्रिक अद्यतन दोनो की ही नितांत आवश्यकता होती है। आधुनिक यंत्रों से सुसज्जित राज्य आपदा मोचक दल (एस.डी.आर.एफ.) भी कुम्भ-2019 में तैनात है जो किसी भी प्राकृतिक अथवा अप्राकृतिक आपदा से निपटने में सिद्धहस्त है। इसके अतिरिक्त पुलिस बल की सहायता से भी विभिन्न घटनाओं को नियंत्रित किया जाएगा, जिसके लिए कुम्भ 2019 में अति प्रशिक्षित पी.ए.सी. (प्रादेशिक सशस्त्र बल) की व्यवस्था की गई है। ताकि कुम्भ में तैनात अन्य पुलिस बलों पर अतिरिक्त भार न पड़े और वे अपनी ड्यूटी सक्षमता पूर्वक कर सकें। ये बल अपनी कार्यक्षमता के लिए देश भर में विख्यात है।

2. अग्नि दुर्घटना

मेला क्षेत्र को अग्नि सुरक्षा के दृष्टिगत 09 जोन एवं 20 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। मेला क्षेत्र में 40 अग्निशमन केन्द्रों एवं 15 अग्निशमन चौकियों का निर्माण किया गया है। दुर्घटना की सम्भावनाओं पर नजर रखने एवं तात्कालिक कार्यवाही हेतु 40 अग्नि दुर्घटना वाच टावरों तथा लगभग 60-80 मीटर पर तकरीबन 4000 फायर हाइड्रेन्टो की व्यवस्था भी की गयी है। मेले में संकीर्ण मार्गों पर व्यवस्थापित अस्थाई पाण्डालों/शिविरों की अग्नि सुरक्षा एवं आपदा के समय त्वरित अग्निशमन/जीवरक्षा की कार्यवाही हेतु अत्याधुनिक उपकरणों एवं हल्के वाहनों का प्रयोग जैसे-अग्निशमन सुरक्षा उपकरणों से सुसज्जित मोटर साइकिल व हाईप्रेशर वाटरमिस्ट वाहन आदि का प्रयोग किया जाएगा।

कुम्भ मेला के दौरान अग्नि सुरक्षा/अग्निशमन प्रणाली को तीन चरणों में क्रियान्वित किया जाएगा। प्रथम चरण में पंडालों/शिविरों में अधिष्ठापित प्राथमिक अग्निशमन उपकरणों जैसे बालू, पानी एवं फायर एक्सटिंग्यूशर का उपयोग, द्वितीय चरण में अग्निशमन उपकरणों से सुसज्जित मोटर साइकिल, वाटरमिस्ट जीप तथा फायर हाईड्रेन्टों का उपयोग सम्मिलित है। तृतीय चरण में मोटर फायर तथा एडवांस रेस्क्यू टेण्डर का उपयोग किया जाएगा।

कुम्भ मेला में नियुक्त सभी अधिकारियों/कर्मचारियों को अग्नि सुरक्षा एवं बचाव हेतु विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रचार एवं प्रसार दल के माध्यम से सभी कल्पवासियों व अन्य हितधारकों को समय-समय पर जनजागरण अभियान चलाकर अग्नि सुरक्षा से सम्बन्धित जानकारियों से अवगत कराया गया है।

मेला क्षेत्र में किसी बड़े हादसे के दौरान अतिरिक्त सहायता हेतु मेला क्षेत्र के अंदर बने किले में उपलब्ध भारतीय सेना के अग्निशमन केंद्र तथा जनपदीय अग्निशमन व्यवस्था पर उपलब्ध वाहनों व उपकरणों की सहायता प्राप्त की जाएगी ताकि दुर्घटना पर नियंत्रण एवं बचाव-राहत कार्य अविलम्ब किया जा सके। आवश्यकतानुसार भारतीय वायु सेना के पास प्रयागराज एयर बेस पर उपलब्ध अग्निशमन यंत्रों जैसे-बाम्बी बकेट्स इत्यादि अग्निशमन संसाधनों की सहायता भी प्राप्त की जाएगी ताकि वायुयान द्वारा प्रचुर मात्रा में जल छिड़काव कर दुर्घटना पर काबू पाया जा सके।

3. भगदड़

मेला क्षेत्र में भगदड़ रोकने की दृष्टि से प्रमुख मार्गों एवं पीपा पुलों पर एकल दिशा मार्गों (वन-वे) का पालन करते हुए पैदल यातायात योजना तैयार की गयी है। योजना में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि अत्यन्त अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर भीड़ एक-दूसरे को क्रॉस करते हुए आगे न बढ़े। योजना में इस बात पर भी विशेष बल दिया गया है कि श्रद्वालुओं का मेले में आगमन नियंत्रित तरीके से धीरे-धीरे हो और निकास तीव्र गति से हो। इस दृष्टि से निकासी मार्गों की चौड़ाई अपेक्षाकृत अधिक रखी गयी है। स्नानघाटों का विस्तार करते हुए 12 किलोमीटर में 41 स्नानघाट बनाए गए हैं, ताकि किसी भी घाट पर भीड़ का दबाव अधिक न होने पाए। श्रद्वालुओं की संख्या का सटीक आकलन करने की दृष्टि से मेला क्षेत्र में 135 वॉच टावर बनाए गए हैं। प्रत्येक पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी को यातायात योजना (डायवर्जन एवं होल्ड अप सहित) के संबंध में पूर्णरूप से प्रशिक्षित किया गया है ताकि ड्यूटी पर तैनात किसी पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी के गलत मार्ग निर्देशन के कारण कोई भ्रम उत्पन्न न हो। क्षेत्राधिकारी, प्रभारी निरीक्षक तथा अन्य अधिकारी प्रत्येक दिन 02-02 घण्टे पर बैरिकेडिंग की स्थिति का अवलोकन अवश्य करेंगे ताकि यदि यह गिरता है तो यातायात योजना लागू करने में कोई कठिनाई न हो। यदि किसी एक स्थल पर श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षाकृत अधिक हो जाती है तो ऐसे स्थानों के कमांड सेंटर से अलर्ट मिलते ही अन्य सुगम रास्तों पर श्रद्धालुओं को डाइवर्ट कर दिया जाएगा।

4. घाटों की दुर्घटना

मेला प्रशासन के सहयोग से यह सुनिश्चित किया गया है कि घाटों के पास कोई दलदल या फिसलन न हो। घाटों पर ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि स्नानार्थियों को प्रेरित करें कि वे घाट पर पानी न फैलाएं, कपड़े आदि न धोएँ ताकि घाटों पर फिसलन न हो। प्रत्येक घाट पर चेकिंग हर आधे घण्टे के बाद नियमित रूप से की जाएगी। घाटों पर फिसलन की स्थिति उत्पन्न होती है तो वहां पर बालू, पटरे, पुवाल आदि डाले जायेंगे ताकि फिसलन न हो। प्रत्येक घाट पर उपरोक्त सामग्री पर्याप्त मात्रा में तथा काम करने वाले मजदूर एवं ‘रेस्क्यू टीम’ नाव एवं अन्य साधनों के साथ भी उपलब्ध रहेंगे। घाटों पर डीप वाटर बैरिकेडिंग की जा रही है ताकि स्नानार्थी गहरे पानी में न जा सकें।

दुर्घटना की स्थिति में घाट को तत्काल ‘कार्डन’ (घेराबन्दी) कर दिया जाएगा ताकि वहां पर नयी भीड़ का दबाव न पड़े और उसे खाली कराकर उस घाट पर तत्काल स्नान बन्द करवा दिया जाएगा।


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